जल्द बैंक बदलना होगा आसान, RBI कर रहा बड़ी प्लानिंग; मोबाइल नंबर की तरह मिलेगा अकाउंट नंबर पोर्ट करने का ऑप्शन!
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जल्द बैंक बदलना होगा आसान, RBI कर रहा बड़ी प्लानिंग; मोबाइल नंबर की तरह मिलेगा अकाउंट नंबर पोर्ट करने का ऑप्शन!

Payments Vision 2028

Payments Vision 2028

नई दिल्ली: Payments Vision 2028: भारतीय रिजर्व बैंक देश के बैंकिंग ढांचे में एक ऐतिहासिक बदलाव की तैयारी कर रहा है. 'पेमेंट्स विजन 2028' के तहत, केंद्रीय बैंक 'बैंक अकाउंट पोर्टेबिलिटी' की सुविधा शुरू करने जा रहा है. यह सुविधा बिल्कुल वैसी ही होगी जैसे वर्तमान में मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (MNP) काम करती है. इसका सीधा अर्थ है कि ग्राहक अपना बैंक बदलने के बावजूद अपना पुराना अकाउंट नंबर बरकरार रख सकेंगे.

क्या है RBI का मास्टर प्लान?

वर्तमान में, यदि कोई ग्राहक अपने बैंक की सेवाओं या ऊंचे शुल्कों से असंतुष्ट होकर बैंक बदलना चाहता है, तो उसे एक नई और जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. नया अकाउंट नंबर मिलने के कारण उसे ऑफिस की सैलरी डिटेल्स से लेकर ईएमआई (EMI) और म्यूचुअल फंड (SIP) तक हर जगह बदलाव करने पड़ते हैं. RBI के नए प्रस्ताव के अनुसार, आपका बैंक खाता नंबर आपकी एक 'यूनिवर्सल फाइनेंशियल आइडेंटिटी' बन जाएगा, जो किसी एक बैंक विशेष तक सीमित नहीं होगा.

EMI और SIP पर नहीं पड़ेगा कोई असर

इस पूरी प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए RBI 'पेमेंट्स स्विचिंग सर्विस' (PaSS) नामक एक अत्याधुनिक तकनीक विकसित कर रहा है. इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि जब आप बैंक 'ए' से बैंक 'बी' में अपना खाता पोर्ट करेंगे, तो आपके खाते से जुड़े सभी ऑटो-डेबिट मैंडेट अपने-आप नए बैंक में शिफ्ट हो जाएंगे. इससे न तो आपकी लोन की किस्तें (EMI) रुकेंगी और न ही निवेश में कोई बाधा आएगी.

ग्राहकों और बैंकों पर प्रभाव

इस कदम का सबसे बड़ा लाभ ग्राहकों को होगा. अब वे उन बैंकों को चुन सकेंगे जो बेहतर ब्याज दरें, कम शुल्क और आधुनिक डिजिटल सुविधाएं प्रदान करते हैं. दूसरी ओर, बैंकों पर अपनी सेवाओं को सुधारने का भारी दबाव होगा. यदि कोई बैंक खराब सर्विस देता है, तो ग्राहक केवल एक क्लिक या आवेदन के जरिए दूसरे बैंक में जा सकेगा. इससे बैंकिंग सेक्टर में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी.

सरकारी योजनाओं का लाभ जारी रहेगा

खाता पोर्ट करने के बाद भी गैस सब्सिडी (DBT) और अन्य सरकारी योजनाओं का पैसा बिना किसी रुकावट के उसी पुराने नंबर पर आता रहेगा. इसके अलावा, केवाईसी (KYC) की जानकारी भी सुरक्षित रूप से नए बैंक के साथ साझा की जा सकेगी, जिससे कागजी कार्रवाई का बोझ काफी कम हो जाएगा. हालांकि RBI वर्तमान में इस तकनीक के सुरक्षा मानकों और तकनीकी चुनौतियों का परीक्षण कर रहा है